बिलासपुर के अस्पताल में महिला की मौत से मचा हड़कंप! इंजेक्शन और इलाज के रिकॉर्ड पर परिजनों ने उठाए सवाल

मोपका के शिव मेडिसिटी अस्पताल में 55 वर्षीय महिला की मौत के बाद विवाद, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग
शिव मेडिसिटी अस्पताल में महिला की मौत के बाद परिजनों ने इलाज पर सवाल उठाए।
बिलासपुर। शहर के मोपका स्थित शिव मेडिसिटी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान 55 वर्षीय महिला की मौत के बाद मामला विवादों में घिर गया है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल में इलाज के तरीके, इंजेक्शन की मात्रा और चिकित्सकीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी और अगले दिन उनकी मौत हो गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
मृतका की पहचान आनंदित भट्टाचार्य के रूप में बताई गई है। वह अपने पति शंकर भट्टाचार्य के साथ त्रिपुरा से बिलासपुर घूमने आई थीं। जानकारी के अनुसार, वह पेट के हिस्से में कैंसर से पीड़ित थीं। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें 22 अक्टूबर 2026 की शाम मोपका स्थित शिव मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इंजेक्शन लगाए जाने के बाद तबीयत बिगड़ने का आरोप
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराए जाने के समय महिला बातचीत कर पा रही थीं। उनके अनुसार, रात करीब आठ बजे के बाद इंजेक्शन लगाए जाने पर उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद 23 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे महिला की मौत हो गई।
मृतका के भतीजे सुमित कुमार चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि महिला को करीब दो घंटे के अंतराल में दो बार इंजेक्शन लगाए गए। उनका दावा है कि एक एमएल की जगह 10 एमएल इंजेक्शन दिए जाने के कारण महिला की हालत बिगड़ी।
हालांकि, इंजेक्शन की वास्तविक मात्रा, दवा का नाम और मौत के कारणों की स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए कथित ओवरडोज को मौत का कारण मानने से पहले उपचार संबंधी दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट की जांच जरूरी है।
मेडिसिन चार्ट नहीं दिखाने का आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान दी गई दवाओं और इंजेक्शन की जानकारी प्राप्त करने के लिए मेडिसिन चार्ट मांगा गया, लेकिन उन्हें यह रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाए कि रात के समय आईसीयू में डॉक्टर मौजूद थे या नहीं।
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में इलाज के दौरान कौन-सी दवाएं दी गईं, कितनी मात्रा में दी गईं और मरीज की स्थिति बिगड़ने पर क्या कदम उठाए गए, इसकी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। इन सवालों के जवाब संबंधित चिकित्सकीय रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही सामने आ सकेंगे।
अस्पताल संचालक पर बदसलूकी और धमकी देने का आरोप
मृतका के परिजनों ने अस्पताल संचालक डॉ. संजय सिंह पर बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसका पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा।
परिजनों ने मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाए।
डॉक्टरों की योग्यता और उपचार प्रक्रिया की जांच की मांग
परिजनों ने संबंधित डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और चिकित्सकीय पंजीयन की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि महिला को दिए गए इंजेक्शन, दवाओं की निर्धारित मात्रा, डॉक्टरों के निर्देश, नर्सिंग रिकॉर्ड और आईसीयू में की गई निगरानी की पड़ताल होनी चाहिए।
मामले में अस्पताल का मेडिसिन चार्ट, उपचार के दौरान दर्ज किए गए विवरण, इंजेक्शन देने का समय और उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनकी समीक्षा से यह समझने में मदद मिल सकती है कि महिला को कौन-सी दवाएं दी गई थीं और उनकी हालत बिगड़ने के दौरान क्या उपचार किया गया।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसकी ओर से कोई आधिकारिक बयान प्राप्त नहीं हुआ था। प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
फिलहाल महिला की मौत के वास्तविक कारण और कथित इंजेक्शन ओवरडोज के बीच संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। निष्पक्ष जांच और चिकित्सकीय दस्तावेजों की समीक्षा के बिना किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
महिला को कौन-सी दवा और कितनी मात्रा में दी गई थी? क्या इलाज से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा होगी? क्या स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
महत्वपूर्ण: इस खबर में इंजेक्शन की अधिक मात्रा, चिकित्सकीय लापरवाही और अन्य अनियमितताओं से संबंधित बातें परिजनों के आरोपों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
सच्ची खबर, जनहित की आवाज









