बिलासपुर में ‘साइबर संवाद’ का आयोजन, IG रामगोपाल गर्ग और SSP रजनेश सिंह ने लोगों को बताए साइबर ठगी से बचने के तरीके
17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे पीड़ित ने सुनाई आपबीती, साइबर ठगी के शिकार लोगों ने साझा किए अपने अनुभव, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी हुई चर्चा

बिलासपुर में ‘साइबर संवाद’ का आयोजन, IG रामगोपाल गर्ग और SSP रजनेश सिंह ने लोगों को बताए साइबर ठगी से बचने के तरीके
17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे पीड़ित ने सुनाई आपबीती, साइबर ठगी के शिकार लोगों ने साझा किए अपने अनुभव, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
बिलासपुर। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने और आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के तहत मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को लाल बहादुर शास्त्री सभागार में साइबर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह ने की। कार्यक्रम में साइबर अपराध से बचाव, ठगी के तरीकों और शिकायत के बाद की जाने वाली कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली से अवगत कराना और साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देना था। इस दौरान उपस्थित लोगों को अपनी शंकाएं रखने और पुलिस अधिकारियों से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिला।
साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली पर IG ने दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों के सवालों का जवाब देते हुए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले विभिन्न तरीकों और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि साइबर ठग किस तरह लोगों का विश्वास जीतकर उनकी व्यक्तिगत कमजोरियों और परिस्थितियों का फायदा उठाते हैं तथा उन्हें आर्थिक ठगी का शिकार बनाते हैं।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बताया कि साइबर ठग फोन पर बातचीत के दौरान किस तरह लोगों की मानसिक स्थिति को समझकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। कई बार ठग भय, लालच या जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों से स्वयं उनके बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। उन्होंने नागरिकों को संदिग्ध कॉल, लिंक और मैसेज से सावधान रहने तथा किसी के साथ OTP या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी।
17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रहे पीड़ित ने सुनाई आपबीती

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि साइबर ठगी के शिकार ऐसे लोगों को भी आमंत्रित किया गया, जिनकी शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम वापस दिलाने में सहायता की थी। इनमें एक पीड़ित ने बताया कि साइबर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 17 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा। ठगों ने भय और दबाव का माहौल बनाकर उन्हें अपने प्रभाव में ले लिया था।
पीड़ित ने कार्यक्रम में अपने साथ हुई पूरी घटना साझा की और बताया कि किस तरह साइबर अपराधियों ने उन्हें लगातार मानसिक रूप से परेशान किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर सरकंडा थाना प्रभारी ने कार्रवाई करते हुए पीड़ित की सहायता की और उन्हें साइबर ठगों के चंगुल से मुक्त कराया।
इसके अलावा अन्य पीड़ितों ने भी अपने साथ हुई ऑनलाइन ठगी की घटनाओं और पुलिस की कार्रवाई के अनुभव साझा किए। उनकी आपबीती सुनकर उपस्थित लोगों को साइबर अपराधियों के वास्तविक तरीकों को समझने का अवसर मिला। पुलिस अधिकारियों ने ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर बुलीइंग पर चर्चा
साइबर संवाद के दौरान बच्चों और बच्चियों के साथ होने वाली साइबर बुलीइंग का मुद्दा भी उठा। बिलासपुर व्यापारी संघ के एक सदस्य ने इस संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सवाल किए। अधिकारियों ने अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान देने और उन्हें इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई। व्यापारी संघ के सदस्य ने भी इस विषय पर अपने सुझाव रखे।
एक मीडियाकर्मी ने भी साइबर अपराध की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर अपने विचार और सवाल अधिकारियों के सामने रखे। इस पर अधिकारियों ने चर्चा करते हुए आवश्यक सुझाव साझा किए।
विद्यार्थियों से इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सतर्क रहने की अपील
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने स्कूली छात्र-छात्राओं से इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग करते समय सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति, लिंक, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों को स्वयं साइबर अपराध के प्रति जागरूक रहने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।
वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने नागरिकों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर घबराएं नहीं और तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने बताया कि समय पर शिकायत करने से ठगी गई रकम को होल्ड कराने और वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ सकती है।
इंस्टाग्राम पर हुआ कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
साइबर संवाद कार्यक्रम को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए बिलासपुर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। इससे सभागार में मौजूद लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी नागरिक कार्यक्रम से जुड़ सके। कार्यक्रम के अंतिम चरण में मीडियाकर्मियों ने पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। अधिकारियों ने सवालों के जवाब देते हुए साइबर अपराध की रोकथाम और नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित जानकारी साझा की।
पुलिस, मीडिया और नागरिकों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में शहर के प्रमुख प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ बैंक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, चेतना ग्रुप, मित्र, आओ संवारें कल अपना ग्रुप, खेल जगत से जुड़े लोगों, सराफा व्यापारियों और व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय के छात्र-छात्राएं और शिक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी) पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ट्रैफिक) रामकुमार करियारे, नगर पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन) परमेश्वर तिलकवार, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोतवाली देवेश सिंह, निरीक्षक गोपाल सतपति सहित अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
बिलासपुर पुलिस की इस पहल के तहत आयोजित साइबर संवाद में पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों के बीच सीधे संवाद के साथ साइबर अपराध से जुड़ी वास्तविक घटनाओं और उनसे बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में लोगों को साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल शिकायत करने का संदेश दिया गया।







